सात साल से वोर्न लाक्रिम एक रोती हुई तलवार और एक ऐसा अपराधबोध ढो रहा है जो कभी भरता नहीं।
जिस रात मोर'थु के आँसू पिघले लोहे की तरह बरसते हैं, वह डूबे हुओं की सड़क पार करके वेल'शारोथ के कैथेड्रल की ओर बढ़ता है — उस जगह, जहाँ मुर्दे आज भी फुसफुसाते हैं और समय उल्टी दिशा में बहता है। उसे मुक्ति नहीं चाहिए। उसे चाहिए हृदय: एक प्राचीन, सोई हुई सत्ता, जो हक़ीक़त को सपने में देखती है और दुःस्वप्नों को माँस-मज्जा में बदल देती है।
सात मुहरों में से पहली को तोड़ते ही वोर्न सिर्फ़ ख़ून से दागी गई अवशेषों का शिकारी नहीं रह जाता। वह बन जाता है पात्र। द्वार। कुंजी।
हर मुहर उससे उसका एक टुकड़ा माँगेगी। हर प्रहरी परखेगा कि घाव के निशान और तलवार की धार के नीचे उसमें इंसान जैसा अब भी कुछ बचा है या नहीं। और जब हड्डियों का जंगल साँस लेता है और वील बंधु मरे हुए बच्चों की आवाज़ों में हँसते हैं, तब देवताओं और दानवों से कहीं ज़्यादा पुराना कुछ पाताल की गहराइयों में जाग उठता है — और चुपचाप देखता रहता है।
क्योंकि हृदय को आज़ाद करने की असली क़ीमत शायद दुनिया का विनाश न हो…
…बल्कि उसके भीतर बसने वाले का बदल दिया जाना हो