《青石原》第二卷 祠堂泣血·乱世守根आकाश पत्थर खंड दो - मंदिर की रुदन, अराजकता में जड़ें संभालना

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闲窗框月

青石原简介 का हिंदी अनुवाद:

青石原 परिचय

टैग: `यथार्थवाद`、`ग्रामीण महाकाव्य`、`बदलता युग`、`बहुपात्रीय गाथा`、`पारिवारिक महाकाव्य`、`ग्राम्य जीवन`、`समय की धारा`、`मानवतावादी साहित्य`

उत्तरी चीन के एक गाँव के परिवारों की आधी सदी में फैली महाकाव्य गाथा। यह गाँव की कई पीढ़ियों की कहानी है — समय की लहरों में ज़मीन, वंश-परंपरा, जीने की जद्दोजहद और तक़दीर के उतार-चढ़ाव की। एक यथार्थवादी, बहुपात्रीय कथा — न कोई चमत्कारी वरदान, न पुनर्जन्म, न समय-यात्रा।

यह इंटरनेट की रोमांचक शैली में लिखा गया एक पारंपरिक उपन्यास है।

नए चीन की स्थापना के बाद के पचास वर्ष — चीन की दो हज़ार वर्षों से भी पुरानी भूमि-व्यवस्था का सबसे बुनियादी बदलाव।

पीली नदी के पुराने प्रवाह-पथ के किनारे बसा एक गाँव है — 青石原। पचास वर्षों की समय-धारा में यह गाँव बनता-बिगड़ता, डूबता-उबरता और साँस लेता रहा।

1952 में तीस वर्ष के 赵德厚 ने मचान-बुर्ज पर चढ़कर देखा कि नदी का पानी गाँव को छूकर यूँ ही बह जाता है। उसने नहर खोदने की ठान ली। गाँव के बूढ़े-बच्चे, सब मिलकर तीन साल तक एक-एक फावड़ा मिट्टी काटते रहे और दो नहरें खोद डालीं। नहर बह निकली तो खेत जी उठे, और लोग भी जी उठे।

उसके बाद के पचास वर्षों में उत्पादन दल, "महान छलांग", अकाल, सांस्कृतिक क्रांति, खेत का ज़िम्मेदारी-आधारित बँटवारा, मज़दूरी के लिए पलायन की लहर — समय की धाराएँ बार-बार उमड़ती रहीं, और 青石原 उनमें उठता-गिरता रहा। पुरखों के मंदिर-घर का दरवाज़ा तोड़ा गया, फिर बंद हुआ; बुर्ज की बत्ती जली, फिर बुझी; जो जवान गए थे, वे लौट आए।

青石原 के प्रमुख पात्र दर्जन भर हैं, और हर किसी की अपनी जीवन-राह है।

पचास वर्ष बीते — नहर अब भी बह रही है, खेतों में अब भी हल चल रहे हैं, पुरखों के मंदिर-घर के द्वार पर घास ऊँची होती है, कटती है, फिर ऊँची होती है। बुर्ज की चोटी पर बँधी वह रस्सी, फट-फट, फट-फट, जीवन भर हवा से जूझती रही।

यह किसी नायक की कहानी नहीं है। यह धरती की कहानी है।

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